Toh Koi Baat bane

12 Nov

दिल में रहने की जगह बनाओ तो कोई बात बने
दर्दे भी सहने का सहस जुटाओ तो कोई बात बने

एक तेरी उम्मीद के सहारे यहाँ तक आगए हैं हम
कठिन राहों में भी साथ निभाओ तो कोई बात बने

आग यहाँ किस तरह जलाती नफरतों के अंधेरे को
एक प्यार का बस दीपक जलाओ तो कोई बात बने

सियासत के समन्दर में हर दिन उठता तूफ़ान नया
इन तूफानों में भी कश्ती चलाओ तो कोई बात बने

थक कर बैठते हैं मुसाफिर घने दरख्तों की छाव मे
तुम सूखेठूंठ में नए पत्ते उगाओ तो कोई बात बने

लगता है अंजाने शहर में रहते सब अजनबी मिलन
ज़रा आदमी से आदमी मिलवाओ तो कोई बात बने

दिल में रहने की जगह बनाओ तो कोई बात बने
दर्दे भी सहने का सहस जुटाओ तो कोई बात बने

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