Maykadon Me

30 Jul

मयकदों में दिन-रात बस यही बात हुई है,
सुबहोशाम ग़म से जो मेरी मुलाकात हुई है,

वो परेशां रहें तो चैन, हमे भी नहीं मिलता,
हालत मेरी यूँ ही तो नहीं, बदहवास हुई है,

किस ग़म के लिए कितनी है मुनासिब शराब,
पैमानों से इस ही बात पर तो तकरार हुई है,

गमें दिल से मिटा देती है यह गमो के निशाँ,
दीवानों में ये इसलिए इतनी मशहूर हुई है,

जब तक कदम न लडखडाये पीने से फायदा,
रिन्दों को तभी इससे मोहब्ब्त बेहिसाब हुई है.

शराब अच्छी है या बुरी इसका फैसला करे,
कभी दवा तो कभी दारु से पहचान हुई है,

मयकदों में दिन-रात बस यही बात हुई है,
सुबहोशाम ग़म से जो मेरी मुलाकात हुई है.

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One Response to “Maykadon Me”

  1. themohit July 30, 2015 at 2:11 pm #

    Awesome one dad!

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