Maloom To Hoga

27 Nov

कहाँ मिलती हैं खुशियाँ, शहर मालूम तो होगा,
तुम्हें दिल में ठहरने का, सबब मालूम तो होगा.

तुम्हें हर बात की अपनी, सही कीमत लगनी है,
किताबे इश्क का तुमको, सबक मालूम तो होगा.

लिखा किस्मत का कुछ, लकीरों से नहीं मिटता,
किधर बनता है दरिया में, भंवर मालूम तो होगा.

हवा चलने से पहले तुम, हवा का रुख पहचानो,
तुम्हें नज़र में आने का, असर मालूम तो होगा.

कहने सुनने से ही शायद, बिगडी बात बन जाए,
दिलों में बात दबाने का ज़हर, मालूम तो होगा.

जहाँ पर फूल खिलते हैं वहीं, गुलशन महकते हैं,
तुम्हें मौसम बदलने का, कहर मालूम तो होगा.

इन आयनों में खुद”मिलन”,अक्स नहीं मिलता,
तुम्हे चेहरे समझने का हुनर, मालूम तो होगा.

कहाँ मिलती हैं खुशियाँ, शहर मालूम तो होगा,
तुम्हें दिल में ठहरने का, सबब मालूम तो होगा.

मिलन ‘मोनी’

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One Response to “Maloom To Hoga”

  1. Mayank Bhatt December 1, 2014 at 3:16 pm #

    Nice

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