Kyon Nahi Karte

25 Sep
कुछ ख्वाबों को आँखों में, सजाया क्यों नहीं करते,
तुम्हें किस बात का है डर, इशारा क्यों नहीं करते ?
वही होंठों पर तो आएगी, जो रहती है तेरे दिल में,
ग़ज़ल वो तन्हा रातों में, सुनाया क्यों नहीं करते ?
कभी नाशाद रहते हो और, कभी नाराज़ रहते हो,
चेहरे की लिखावट को, नुमाया क्यों नहीं करते ?
दिल के दरवाजों को मैंने, अब खुला ही रक्खा है,
तुम यह घर बसाने का, इरादा क्यों नहीं करते ?
जो लिखा था तेरे मन में, वही पढ़ कर सुनाया है,
दिल का मौसम और, सुहाना क्यों नहीं करते ?
कुछ ख्वाबों को आँखों में, सजाया क्यों नहीं करते,
तुम्हें किस बात का है डर, इशारा क्यों नहीं करते ?
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