Chitrakaar

3 Dec

ऐ मेरे मन के चित्रकार,अब एक ऐसा चित्र बना दे तू,

ह्रदय के कलुषित भावों को,बस किसी तरह छुपा दे तू,

देख सके उन्हें ना कोई,ऐसा उपयुक्त  रंग चढा दे तू.

ऐ मेरे मन के चित्रकार ………. (१)

नयनो की भाषा का अभिप्राय,उसमे तुम समझा देना,

मौन अधरों की मायूसी पर थोड़ी,मुस्कान थिरका देना,

घोर रजनी बेला में भी एक,प्रज्वलित मार्ग दर्शा दे तू,

ऐ मेरे मन के चित्रकार ……….(२)

शाखों पे मुस्काने वाली हर,कली गजरे में सजवा देना,

मेघों से गिरने वाली हर बूँद का प्रयोजन समझा देना,

मिटटी की सोंधी सुगंध का,आभास जरा करवा दे तू.

ऐ मेरे मन के चित्रकार ……….(३)

इस पतझड़ और बहार को,एक नवीन स्वरुप दे देंना,

धरती और गगन की,दूरी बेझिझक तुम मिटा देना,

जीवन के नित झंझावातो की,कुछ लहरें उभरा दे तू.

 ऐ मेरे मन के चित्रकार ……….(४)

पुष्पों को धर्यशील बना दे, शूलों को कोमलता दे देना,

   ब्रहम जीव की माया को भी,आलोकित तुम करवा देना,

जीवन के सब इन्द्रधनुषी स्वप्नों को,सम्पूर्ण बना दे तू.

ऐ मेरे मन के चित्रकार ………. (५)

होनी-अनहोनी का ज़रा,सम्बन्ध तुम  समझा देना,

मिलन और विच्छेद में जोभी, मतभेद है मिटा देना,

समय की गति को किसी तरह,मेरे अनुकूल बना दे तू,

ऐ मेरे मन के चित्रकार ………. (६)

राहों पे उठने वाला,हर पग मंजिल तक पंहुचा देना,

धरती और गगन की दूरी,शितिज पर मिलवा देना,

जीवन चक्र के भवसागर की एक,लहर दिखला दे तू.

ऐ मेरे मन के चित्रकार,अब एक ऐसा चित्र बना दे तू,

ह्रदय के कलुषित भावों को,बस किसी तरह छुपा दे तू,

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One Response to “Chitrakaar”

  1. Manu December 5, 2013 at 2:12 am #

    Very Touching….

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