Anchaha Silsila

16 Apr

अनचाहा सिलसिला

न जीने की आरज़ू है, न मरने का हौसला है,

न रास्ते पर मंजिल, न मंज़िल का रास्ता है,

वो मिलते नहीं, तो चैन मिलता नहीं,

वो मिलते हैं जब, नज़र मिलती नही

लाख चाह कर भी, कुछ कह न सके,

बात करने को, कोई बात मिलती नहीं,

किसी कशमकश में शायद दिल का कारवां है, न जीने की आरज़ू है, न मरने का हौसला है,

तुम तो पिलाते रहे, और हम पीते रहे,

अश्क आते रहे, और वो मुस्कुराते रहे,

है इलाज नहीं कोई भी, ज़ख्मों का मेरे,

पुराने भरे तक नहीं और नए लगते रहें

अब बची कोई मन्नत, और न कोई दुआ है, न जीने की आरज़ू है, न मरने का हौसला है.

कुछ कदम उठाये, जो गलत हो गए,

कुछ सपने सजाये, जो कफ़न हो गए,

बादल उम्मीदों के, तो घिरे हर तरफ,

कुछ बरसे ही नही, कुछ दफ़न हो गए,

मेरी राहगुज़र पर, यह अनचाहा सिलसिला है. न जीने की आरज़ू है, न मरने का हौसला है.

न जीने की आरज़ू है, न मरने का हौसला है,

न रास्ते पर मंजिल, न मंज़िल का रास्ता है.

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