Sirhan

9 Apr

सिरहन 

सिरहन सर्द हवा की,

उसपर,

आगोश की तपन,

ठहर गया मौसम,

बदचलन.

बिखरी कपकपाती धूप,

दूब के फर्श पर,

ओस पर फैला,

पीलापन,

याद हो आई,

अनायास,

वो पहली बरसात.

बर्फ हो गए हाथ,

पहचान एक आहट की,

समझ आ गयी,

अचानक,

उमड़ ही गया,

आँखों में,

आंसू एक बेईमान.

दूर तक आ गए,

रास्ते,

मेरे साथ,

इनसे क्या पूछें,

इस मौसम का हाल.

उम्र भर टूटने का,

अहसास,

करा गया आखिर,

एक सवाल,

क्या यथार्थ को,

सपने,

आते नहीं रास.

सिरहन सर्द हवा की,

उसपर,

आगोश की तपन,

ठहर गया मौसम,

बदचलन.

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