Labrez

6 Apr

 लबरेज़ 

 

जलती शमा का परवाना हूँ, कुछ ऐसा दीवाना हूँ,

मोहब्बत की मदहोशी से, लबरेज़ एक पैमाना हूँ.

मरीज़-ऐ-हुस्न हूँ, इश्क-ऐ-सुरूर आने दे,

मेरे नाशाद दिल को कुछ करार आने दे,

चलो तय कर  लें मामला-ऐ इश्क दोनों,

कुछ और मुझको अपने करीब आने दे.

मदभरी आँखों से छलका, छलका हुआ मैखाना हूँ.

मोहब्बत की मदहोशी से, लबरेज़ एक पैमाना हूँ.

बात जो दिल में है जुबान पर आने दे,

जो ख्वाब देखें हैं, अंजाम तक आने दे,

बीच की दीवारें ज़रा तोड़ कर देख लो,

घर में रोशनी की किरण तो आने दे,

तेरी शोख जवानी जैसा, एक अल्हड आवारा हूँ.

मोहब्बत की मदहोशी से, लबरेज़ एक पैमाना हूँ.

यौवन पर कलियों सा निखार तो आने दे.

वस्ल-ऐ-इश्क की इधर लहर तो आने दे.

टूट जायगा इंतज़ार पलक झपकते ही,

ज़रा रात ढले और सहर तो आने दे.

मंजिल दर मंजिल भटक रहा हूँ, ऐसा बंजारा हूँ,

मोहब्बत की मदहोशी से, लबरेज़ एक पैमाना हूँ.

खिली हुई कली में निखार तो आने दे,

चेहरे पर जुल्फों का बादल तो छाने दे,

इन चंचल हवाओं का अंदाज़ देख कर,

महकी महकी इधर महक बस आने दे.

गुलशन में बहती हवाओं से, कितना अनजाना हूँ,

मोहब्बत की मदहोशी से, लबरेज़ एक पैमाना हूँ.

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