Sard Hava

11 Dec

सर्द हवा 

सिरहन

सर्द हवा की,

उसपर

आगोश की तपिश,

ठहर गया मौसम

बेशर्म.

बिखरी,

कपकपाती धूप,

सुबह ओस पर

फैला पीलापन,

गोरे बदन पर जैसे.

गीलापन.

अनजानी सी

एक आहट,

याद हो आयी

अनायास.

उड़ा गयी यह हवा भी

चलते चलते,

बस उसका उपहास.

ऐसे में चलो,

स्पर्श कर लें,

एक दूजे को,

होंठो से,

कुछ न बोले,

मन से मन की बात कह लें,

दीवाने पन में.

मखमली

बाहों के दायरों में

बंध जाएँ,

धडकनों को

महसूस कर लें,

सिरहन सर्द हवा की,

ज़ब्त कर लें.

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