Hamara Nahi Lagta

5 Nov

 हमारा नहीं लगता

घर हमारा हो कर भी,हमारा नहीं लगता,

इतना बिखरा सामान, हमारा नहीं लगता.

यादों की कोई भी तस्वीर, नहीं दीवारों पे,

सूना कमरा इस कदर, हमारा नहीं लगता.

छाँव पत्तों पे बैठी हो, जमी पर आये नहीं,

कड़ी दोपहर दरख्त वो, सहारा नहीं लगता.

तूफ़ान जज्बातों का बेहद, तेज़ हो जाए तो,

किनारे पहुँच कर भी, किनारा नहीं लगता.

संजो कर आँखों मे ही रखा जिन्हें हमेशा,

टूटा हुआ ख्वाब अभी हमारा नहीं लगता.

घर हमारा हो कर भी,हमारा नहीं लगता,

इतना बिखरा सामान, हमारा नहीं लगता.

 ————————————————

Advertisements

2 Responses to “Hamara Nahi Lagta”

  1. R. Shankar November 12, 2012 at 9:52 pm #

    A little sad, but nice one.

    • milanbhatnagar November 13, 2012 at 5:55 am #

      Thanks Mr Shanker, It is bit sad Ghazal where GHAR = HEART, SAAMAN = THOUGHTS

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: